Saturday, April 5, 2025

बीएनएस धारा 353 क्या है | BNS 353 in Hindi – सजा जमानत और अपवाद

बीएनएस की धारा 353 भारतीय समाज में शांति और सौहार्द (Cordiality) बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रावधान है। यह उन अपराधों से संबंधित है जो किसी भी व्यक्ति द्वारा झूठी जानकारी, अफवाहें या भयावह समाचार फैलाने के लिए किए जाते हैं, जिससे समाज में विभिन्न समूहों के बीच तनाव, शत्रुता या नफरत का माहौल उत्पन्न हो सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य समाज में शांति बनाए रखना और लोगों के बीच किसी भी प्रकार के विवाद या हिंसा (Conflict or Violence) को रोकना है।

सरल भाषा में कहे तो, यह धारा उन लोगों को दंडित करती है जो जानबूझकर झूठी सूचना (False Information) फैलाकर अलग-अलग समूहों के बीच दुश्मनी या नफरत पैदा करते हैं।

BNS की धारा 353 में सार्वजनिक उपद्रव फैलाने वाले बयान के अपराध को अलग-अलग उपधाराओं के द्वारा बताया गया है, जो इस तरह से है:-

बीएनएस धारा 353 की उपधारा (1):- यदि कोई व्यक्ति झूठी जानकारी, अफवाह या गलत रिपोर्ट बनाता है और उसे प्रकाशित या प्रसारित (Published Or Broadcast) करता है, चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक माध्यम (जैसे इंटरनेट, टीवी, सोशल मीडिया) से हो या किसी अन्य माध्यम से, तो यह धारा 353 (1) के तहत अपराध माना जाएगा।

धारा 353 (1) में अपराधों को इसके तीन खण्ड (Clause) A, B, C में भी अलग-अलग प्रकार से बताया गया है।

धारा 353 (1) खण्ड (A) – सेनानौसेनावायुसेना के सैनिकों को विद्रोह के लिए उकसाना:

अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर ऐसी गलत जानकारी देता है या अफवाह (Rumour) फैलाता है जिससे भारतीय सेना, नौसेना, या वायुसेना के सैनिकों में विद्रोह (Rebellion) की भावना उत्पन्न हो तो यह अपराध है। इसका उद्देश्य यह है कि सेना और उसके अधिकारी देश की सुरक्षा और शांति के प्रति अपने कर्तव्यों का सही तरीके से पालन करें।

धारा 353 (1) खण्ड (B) – जनता में भय पैदा करना:

अगर कोई व्यक्ति झूठी खबर या जानकारी के जरिए जनता या किसी विशेष वर्ग में डर फैलाने का इरादा रखता है। जिससे किसी व्यक्ति को राज्य के खिलाफ या सार्वजनिक शांति (Public Peace) के खिलाफ अपराध करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है, तो यह भी एक अपराध है। यह इसलिए जरूरी है ताकि किसी भी झूठी खबर के कारण समाज में डर या हिंसा (Violence) न फैले।

धारा 353 (1) खण्ड (C) – विभिन्न समुदायों के बीच नफरत फैलाना:-

अगर कोई व्यक्ति किसी वर्ग या समुदाय को किसी अन्य वर्ग या समुदाय के खिलाफ अपराध करने के लिए उकसाता है, या उसके उकसाने (Provoke) की संभावना होती है, तो यह भी इस धारा के तहत अपराध माना जाएगा। इस तरह की अफवाहें या झूठी जानकारियाँ समाज में साम्प्रदायिक हिंसा (Communal Violence) और अस्थिरता का कारण बन सकती हैं।

बीएनएस धारा 353 की उपधारा (2): अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी धर्म या जाति के बारे में गलत जानकारी, अफवाह या चौंकाने वाली खबरें बनाता है या उसे बढ़ावा देता है तो यह अपराध है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक माध्यम (जैसे सोशल मीडिया, वेबसाइट) का भी उपयोग शामिल है।

इस धारा के तहत कोई भी ऐसा बयान या रिपोर्ट बनाना या उसे प्रकाशित करना जिसका उद्देश्य किसी धार्मिक, भाषाई या क्षेत्रीय समूहों के बीच शत्रुता, घृणा या द्वेष को बढ़ाना हो तो यह एक गंभीर अपराध माना जाएगा।

बीएनएस सेक्शन 353 की उपधारा (3): अगर कोई व्यक्ति पूजा के स्थान (जैसे मंदिर, मस्जिद, चर्च आदि) में या धार्मिक पूजा या समारोह के दौरान उपधारा (2) में बताए गए अपराध करता है, तो वह दंड का पात्र होगा।

यह अपराध किसी धार्मिक समारोह में भी हो सकता है, जहां लोग एकत्र होते हैं। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति वहां गलत जानकारी या अफवाह फैलाता है, जिससे लोगों के बीच तनाव या घृणा उत्पन्न होती है, तो यह अपराध माना जाएगा।

BNS 353 के अपराध को साबित करने वाले मुख्य तत्व

  • किसी भी तरह की झूठी खबर, अफवाह या भयावह सूचना फैलाना।
  • यह सूचना किसी भी माध्यम से फैलाई जा सकती है, जैसे कि सोशल मीडिया, समाचार पत्र, या मुंह-जबानी।
  • फैलाई गई झूठी सूचना का मकसद विभिन्न समूहों के बीच नफरत, दुश्मनी या बुरा भला पैदा करना होना चाहिए।
  • इन समूहों में धार्मिक, जातिगत, या राजनीतिक समूह शामिल हो सकते हैं।
  • व्यक्ति को यह जानकर झूठी सूचना फैलानी चाहिए कि इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ेगा।
  • यह एक जानबूझकर किया गया अपराध होना चाहिए गलती से नहीं।

उदाहरण: यदि कोई व्यक्ति सोशल मीडिया पर किसी विशेष धर्म के लोगों के बारे में झूठी और अपमानजनक बातें लिखता है, तो वह बीएनएस सेक्शन 353 के तहत दोषी पाया जा सकता है।

कुछ ऐसे कार्य जिनको करना धारा 353 के तहत आरोपी बना सकता है

  • किसी विशेष धर्म, जाति या समुदाय के खिलाफ झूठी और अपमानजनक पोस्ट करना।
  • किसी धर्म की मान्यताओं या प्रतीकों का अपमान करना।
  • किसी विशेष जाति के लोगों के बारे में झूठी अफवाहें फैलाना।
  • किसी राजनीतिक विरोधी के खिलाफ झूठे आरोप लगाकर उनकी छवि खराब करना।
  • किसी विशेष समूह के खिलाफ नफरत फैलाने वाले भाषण देना।
  • झूठी खबरों को सच बताकर लोगों को गुमराह करना।
  • किसी घटना के बारे में झूठी अफवाहें फैलाकर दहशत फैलाना।
  • विभिन्न धार्मिक या जातिगत समूहों के बीच झगड़ा करवाने के लिए उकसाना।
  • देश की एकता और अखंडता को कमजोर करने वाले कार्य करना।
  • किसी समूह के खिलाफ हिंसा भड़काने वाले नारे लगाना।

बीएनएस सेक्शन 353 के अपराध का उदाहरण

रिया नाम की लड़की एक छोटे से शहर में रहती थी। वह सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय थी और अक्सर अपनी राय साझा करती थी। एक दिन उसने अपने शहर के एक प्रसिद्ध मंदिर के बारे में एक झूठी बात को पोस्ट किया। उसने लिखा कि इस मंदिर में कुछ अजीब गतिविधियां हो रही हैं और यहां कुछ गलत हो रहा है। उसने इस पोस्ट में कई झूठे आरोप लगाए और मंदिर के पुजारी पर गंभीर आरोप लगाए।

रिया की पोस्ट तेजी से वायरल हो गई और पूरे शहर में तनाव फैल गया। लोगों ने मंदिर के बाहर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया और मंदिर के पुजारी के खिलाफ नारे लगाने लगे। पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बुलाना पड़ा। इस मामले में रिया को धारा 353 के तहत दोषी ठहराया जा सकता है क्योंकि उसने जानबूझकर झूठी सूचना फैलाई और इससे विभिन्न समूहों के बीच नफरत पैदा की।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 353 के अपराध की सजा

बीएनएस की धारा 353 के अपराध में सजा (Punishment) को अपराध की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग प्रकार से इसकी उपधाराओं (Sub-Sections) के द्वारा बताया गया है जो कि इस तरह से है:-

  • BNS 353 (1) की सजा:- यदि कोई व्यक्ति धारा 353(1) व इसके खण्डों में बताई गई गलत जानकारी या अफवाह फैलाने का दोषी पाया जाता है, तो उसे तीन साल तक की जेल व जुर्माने की सजा से दंडित किया जा सकता है।
  • BNS 353 (2) की सजा:- अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी धर्म या जाति के बारे में गलत जानकारी, अफवाह या चौंकाने वाली खबरें बनाता है या उसे बढ़ावा देने के जुर्म का दोषी पाया जाता है तो उसे तीन साल तक की जेल व जुर्माने की सजा दी जा सकती है।
  • BNS 353 (3) की सजा:- अगर कोई व्यक्ति पूजा के स्थान (जैसे मंदिर, मस्जिद, चर्च आदि) में या धार्मिक पूजा या समारोह के दौरान उपधारा (2) में बताए गए अपराध करता है। तो उस व्यक्ति को न्यायालय के द्वारा दोषी (Guilty) पाये जाने पर पाँच साल तक की जेल व जुर्माना लगाकर सजा दी जा सकती है।

BNS Section 353 के अपराध के लिए अपवाद

यह अपवाद (Exception) उन मामलों से संबंधित है जहां किसी व्यक्ति के खिलाफ धार्मिक स्थल या समारोह में गलत जानकारी फैलाने के लिए कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसे सरल भाषा में समझते हैं:

  • यदि कोई व्यक्ति ऐसा बयान, कोई सूचना, अफवाह या रिपोर्ट बनाता, प्रकाशित या प्रसारित करता है और उसके पास यह मानने के लिए उचित आधार है कि वह जो जानकारी दे रहा है, वह सच है तो यह अपराध नहीं माना जाएगा।
  • इसका मतलब है कि यदि व्यक्ति ने यह जानकारी बिना किसी बुरे इरादे के और अच्छे विश्वास में (मतलब बिना किसी नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से) साझा की है, तो वह दंड से बच सकता है।
  • यदि वह व्यक्ति जानबूझकर किसी समुदाय (Community) के खिलाफ घृणा, शत्रुता या द्वेष फैलाने का इरादा नहीं रखता है, तो यह भी इस अपवाद का हिस्सा है।
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