भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 के प्रावधान अनुसार बताया गया है, कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर (Intentionally) किसी भी व्यक्ति का अपमान (Insult) करने या उसको उकसाने (Provoke) के लिए कोई भी ऐसा गलत कार्य करता है। जिससे उस व्यक्ति को गुस्सा आए और वहाँ पर झगड़े का माहौल बन जाए।
यानी अगर कोई व्यक्ति आपका अपमान करके आपको उकसाने व सार्वजनिक शांति (Public Peace) को भंग करने की कोशिश करता है, तो उस पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर कार्यवाही की जा सकती है। यह अपमान मौखिक, लिखित व किसी प्रकार के गलत इशारों द्वारा भी किया जा सकता है।
बीएनएस की धारा 352 के अपराध के आवश्यक तत्व:
- जानबूझकर अपमान: कार्य जानबूझकर किया जाना चाहिए और दूसरे व्यक्ति का अपमान करने के इरादे से किया जाना चाहिए।
- उकसावा: अपराधी का इरादा किसी व्यक्ति का अपमान करके उसकी शांति भंग (Breach of Peace) करने या कोई अन्य अपराध करने के लिए उसे उकसाने का होना चाहिए।
- सार्वजनिक शांति: सार्वजनिक शांति का अर्थ है समाज व समुदाय की शांति, जिसके आस-पास किसी भी प्रकार की हिंसा ना हो।
- अनजाने में नहीं: अगर कोई अनजाने में आपका अपमान करता है तो BNS Section 352 लागू नहीं होती है।
भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 के अपराध का उदाहरण:
एक दिन साहिल बाजार में किसी सामान को लेने के लिए लाइन में इंतजार कर रहा था। उसे लाइन में लगे हुए 1 घंटे से भी ज्यादा का समय हो गया था, लेकिन उसका नंबर अभी तक नहीं आया था। अचानक से विशाल नाम का एक व्यक्ति वहाँ पर आता है, और लाइन में साहिल से आगे आकर घुस जाता है। जिसके कारण साहिल विशाल को बोलता है कि तुम्हें लाइन में पीछे लगना चाहिए, हम पहले से यहाँ खड़े है।
जिसके बाद विशाल पीछे मुड़ता है और साहिल के पास जाकर जानबूझकर उसका अपमान करने के लिए गाली-गलौज (Abuse) व बुरा-भला कहने लगता है। जिसके कारण साहिल को भी गुस्सा आ जाता है, और वहाँ लड़ाई जैसे माहौल बन जाता है। ऐसे में यदि साहिल विशाल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज (Complaint Register) करा देता है तो विशाल के खिलाफ BNS Section 352 के तहत कार्यवाही की जा सकती है।
बीएनएस सेक्शन 352 में सजा का प्रावधान – Punishment of BNS Section 352 in Hindi
बीएनएस की धारा 352 का उल्लंघन करने की सज़ा (Punishment) के रुप में बताया गया है, कि जो कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी व्यक्ति का अपमान करके उन्हें हिंसा (Violence) या आपराधिक कार्यों को करने के लिए उकसाने की कोशिश करता हैं। ऐसे अपराध करने वाले व्यक्तियों को न्यायालय द्वारा दोषी (Guilty) पाये जाने पर दो साल तक की कैद व जुर्माना या दोनों की सजा से दंडित किया जा सकता है।